मनुष्य के अन्तराल में अनेकानेक रहस्यमयी गुप्त शक्तियों का भाण्डागार विद्यमान है।

पर हैं ये सभी प्रसुप्त स्थिति में दबी हुई... यदि इन्हें जागृत और विकसित किया जा सके तो वह उन अलौकिक शक्तियों का स्वामी बन सकता है, जिन्हें सामान्य जन आश्चर्यजनक कहते समझते हैं...

आवश्यकता इस बात की है कि सूक्ष्म की सामर्थ्य को महत्व दिया जाय एवं ऐसे घटनाक्रमों को कपोल कल्पित अथवा कौतूहल न मानकर सूक्ष्म को साधने का प्रयास किया जाय। 

 हम आपको यक़ीन दिलाना चाहते हैं कि सिल्व़ा द्वारा इस काया में वाँछित परिवर्तन कर बहुत कुछ कर दिखाना मनुष्य के लिए संभव है!


...लोग जानकारी प्राप्त करने के लिए सामान्यत: अपनी पांच इन्द्रियों- आंख, कान, नाक, जीभ तथा त्वचा का प्रयोग करते हैं, किन्तु हम इन इन्द्रियों के प्रयोग के बिना भी असामान्य विधियों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं...

सिल्व़ा द्वारा यह अद्भुत संभावनाएं मुमकिन हैं!



अतीन्द्रिय ज्ञान

कहते हैं कि पाँच इंद्रियाँ होती हैं- नेत्र, नाक, जीभ, कान और यौन। इसी को दृश्य, सुगंध, स्वाद, श्रवण और स्पर्श कहा जाता है। 

किंतु हम इन इन्द्रियों के प्रयोग के बिना भी असामान्य विधियों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं...

असामान्य विधियों के द्वारा जानकारी प्राप्त करने की इस क्षमता को परामनोविज्ञान अतीन्द्रिय बोध की संज्ञा देता है। 

दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि अतीन्द्रिय बोध किसी व्यक्ति की छठी इन्द्रिय है।


...पाँच इंद्रियाँ के अलावा एक और छठी इंद्री भी होती है जो दिखाई नहीं देती, लेकिन उसका अस्तित्व महसूस होता है...

सिक्स्थ सेंस के कई किस्से-कहानियाँ किताबों में भरे पड़े हैं। इस ज्ञान पर कई तरह की फिल्में भी बन चुकी हैं और उपन्यासकारों ने इस पर उपन्यास भी लिखे हैं।



मेस्मेरिज्म या हिप्नोटिज्म जैसी अनेक विद्याएँ इस छठी इंद्री के जाग्रत होने का ही कमाल होता है। 

हम आपको बताना चाहते हैं कि छठी इंद्री क्या होती है और सिल्व़ा द्वारा इसकी शक्ति कैसे हासिल की जा सकती है और यह भी कि जीवन में हम इसका इस्तेमाल किस तरह कर सकते हैं!


छठी इंद्री के जाग्रत होने से व्यक्ति में भविष्य में झाँकने की क्षमता का विकास होता है,

अतीत में जाकर घटना की सच्चाई का पता लगाया जा सकता है,

वर्तमान, भूत या भविष्य में से किसी भी काल की जानकारी प्राप्त हो सकती है,

मीलों दूर बैठे व्यक्ति की बातें सुन सकते हैं,

किसके मन में क्या विचार चल रहा है इसका शब्दश: पता लग जाता है,

एक ही जगह बैठे हुए दुनिया की किसी भी जगह की जानकारी पल में ही हासिल की जा सकती है,

छठी इंद्री प्राप्त व्यक्ति से कुछ भी छिपा नहीं रह सकता और इसकी क्षमताओं के विकास की संभावनाएँ अनंत हैं!




कैसे बढायें अपनी अतीन्द्रिय क्षमता को?



सिल्व़ा तकनीकों के प्रयोग से आप अपनी अतीन्द्रिय शक्ति को जाग्रत कर सकते हैं, 

छठी इंद्रिय को जाग्रत कर सकते हैं। टेलीपैथिक कम्युनिकेशन कर सकते हैं,


मन से मन का संपर्क  कर सकें और अपनी समस्या बता सकें, संपर्क साध सकें,

 यंत्रों से नहीं, मन से! 


दूर का दर्शन, दूर का श्रवण, ये काल्पनिक शक्तियां नहीं हैं, अत्यंत वास्तविक हैं!






 


 

 

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